रिपोर्ट- धीरज मद्धेशिया
डीबीएस न्यून, सोनौली। भैरहवा पोखरा टीचिंग अस्पताल सहित पूरे नेपाल की नर्सों ने उचित वेतन और सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। बीते रविवार से वह इसलिए विरोध प्रदर्शन कर रही हैं क्योंकि उन्हें सरकारी मानकों से कम वेतन मिलता है, जोखिम भत्ता नहीं मिलता और उनके साथ व्यवहार सही नही किया जाता है। टीचिंग अस्पताल में कार्यरत नर्सों को केवल 15 से 20 हज़ार रुपये का वेतन मिलता है। जो सरकारी मानकों 34 हज़ार रुपये से काफ़ी कम है। उनकी शिकायत है कि उन्हें ओवरटाइम भत्ता और अन्य सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं। पोखरा में पिछले दो हफ़्तों से प्रदर्शनकारी नर्सें ‘हम नर्स हैं, मशीन नहीं, 15 हज़ार ज़िंदा रहने के लिए काफ़ी नहीं’ जैसे नारे लिखी तख्तियाँ लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। जबकि भैरहवा में शुक्रवार पाँचवे दिन भी उनका प्रदर्शन जारी था। भारतीय सीमा से सटे नेपाल के भैरहवा मेडिकल कालेज की नर्सों का आंदोलन बेहतर वेतन, भत्ते और कार्य-परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर नर्सिंग स्टाफ ने शुक्रवार भी अस्पताल परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। आंदोलन के कारण अस्पताल की अधिकांश सेवाएं ठप पड़ी रहीं और रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पताल के ओपीडी, वार्ड और सामान्य सेवाएं प्रभावित हैं। कई रोगियों को इलाज न मिलने पर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। भर्ती रोगियों की देखरेख इंटर्न डाक्टर और सीमित जूनियर स्टाफ के भरोसे चल रही है। नर्सों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं होता, वे काम पर नहीं लौटेंगी। नर्सों के कारण अस्पताल की सेवाएं ठप हो गई हैं। नर्सें वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रही हैं। आंदोलन के चलते मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को इलाज के लिए दिक्कतें हो रही हैं।
मेडिकल साइंसेज भैरहवा के सूचना अधिकारी सुशील गुरुंग ने बताया कि अस्पताल प्रशासन और नर्सों के बीच बातचीत जारी है।
